‘‘स्नातक स्तर पर अध्ययनरत विद्यार्थियों में प्रगतिशीलता एवं रूढ़िवादिता का अध्ययन’’

Authors

  • डाॅ अबधेश सिंह Author

DOI:

https://doi.org/10.8855/jdae5y02

Abstract

भारतीय संस्कृति तथा सभ्यता की जडे़ काफी गहरी तथा विस्तृत हैं। भारत की सभ्यता विश्व की प्राचीनतम सम्यताओं में से एक है। प्राचीनकाल से मध्यकाल तथा मध्यकाल से आधुनिक काल तक आते-आते समाज में अनेकों परिवर्तन दृष्टिगोचर होते देखे गये हैं।
    समाज में होने वाले परिवर्तनों के फलस्वरूप दो तरह के लोग एक रूढ़िवादी या अपरिर्वतनशील तथा दूसरा प्रगतिशील या आधुनिक पाये जाते हैं। साथ ही अनेकों ऐसे लोग भी होेते हैं जो समय के अनुसार रूढ़िवादी या प्रगतिशील होने का ढोग करते हैं।

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Published

2013-2025

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Articles