हिंदी लोकगीतों में स्त्री जीवन का चित्रण

Authors

  • दीपा रानी Author

DOI:

https://doi.org/10.8855/84tyeh73

Abstract

   हिंदी लोकगीतों में स्त्री की स्थिति बहुआयामी है। वे एक ओर सामाजिक बंधनों में बंधी हुई दिखाई देती हैं, तो दूसरी ओर उनकी आवाज इन गीतों में एक स्वाभाविक अभिव्यक्ति के रूप में उभरती है। इन गीतों के माध्यम से हम स्त्री के मनोविश्व, भावनात्मक संघर्ष, श्रम, प्रेम और सामाजिक असमानताओं को समझ सकते हैं। नारी विमर्श की दृष्टि से लोकगीतों का अध्ययन स्त्री साहित्य और समाज की वास्तविक स्थिति को जानने का महत्वपूर्ण स्रोत है। आज भी डिजिटल युग में लोकगीतों के माध्यम से स्त्रियाँ अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी हुई हैं। सोशल मीडिया और यूट्यूब जैसे मंचों पर लोकगीतों की प्रस्तुति यह दिखाती है कि कैसे ये गीत समय के साथ बदलते हुए भी स्त्री जीवन के अनुभवों को सहेजे हुए हैं।

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2013-2025

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Articles