न्यायिक सक्रियता के आयाम
DOI:
https://doi.org/10.8855/dn2qta56Abstract
न्यायिक सक्रियता बहुत ही व्यापक और बहुआयामी अवधारणा है। यह अवधारणा न्यायालय अथवा न्यायाधीशों की सक्रिय स्वरूप को उजागर करती है। लोकतंत्र में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष न्यायपालिका की अपेक्षा की जाती है। लोकतंत्र में विधायिका और कार्यपालिका की अपेक्षा न्यायालय द्वारा जनहित के प्रति अपने कर्तव्यों और दायित्वों को कर्मठता, तत्परता और सक्रियता से निर्वहन करना न्यायिक सक्रियता का द्योतक है। यदि विधायिका और कार्यपालिका जनहित के प्रति अपने कर्तव्यों और दायित्वों से विमुख जाए और उनकी भूमिका गौण हों तो ऐसे में न्यायालय को स्वतः आगे आना होता है ताकि विधि का शासन कायम रहे, मूल अधिकारों का अतिक्रमण न हो, अराजकता और भ्रष्टाचार का बोलबाला न हो। इस संदर्भ में न्यायालय जनहित के प्रति विधायिका और कार्यपालिका के कर्तव्यों एवं दायित्वों को सुनिश्चित करता है क्योंकि लोकतंत्र में जनहित की उपेक्षा नहीं की जा सकती है।
