"दक्षिण भारत के विभिन्न राज्यों में सिंचाई व्यवस्था का ऐतिहासिक विकास: एक ऐतिहासिक एवं पर्यावरणीय अध्ययन"

Authors

  • आलोक कुमार and डॉ निशा बालियान Author

DOI:

https://doi.org/10.8855/vw11v936

Abstract

 

दक्षिण भारत का कृषि इतिहास जल संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन से गहराई से जुड़ा हुआ है। मानसूनी वर्षा पर निर्भरता और भौगोलिक विविधता के कारण इस क्षेत्र में सिंचाई प्रणालियों का विकास अत्यंत आवश्यक था। प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य दक्षिण भारत के प्रमुख राज्यों—तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना तथा केरल—में सिंचाई व्यवस्था के ऐतिहासिक विकास का विश्लेषण करना है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि दक्षिण भारत में सिंचाई प्रणालियाँ केवल तकनीकी संरचनाएँ नहीं थीं, बल्कि वे सामाजिक संगठन, आर्थिक संरचना तथा पर्यावरणीय संतुलन से गहराई से जुड़ी हुई थीं। प्राचीन और मध्यकालीन काल में तालाब आधारित सिंचाई प्रणाली तथा स्थानीय जल संचयन संरचनाओं का व्यापक विकास हुआ। इन प्रणालियों के निर्माण और रखरखाव में स्थानीय समुदायों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। औपनिवेशिक काल में ब्रिटिश प्रशासन ने इंजीनियरिंग आधारित सिंचाई परियोजनाओं के माध्यम से जल प्रबंधन को अधिक केंद्रीकृत स्वरूप प्रदान किया। यद्यपि इन परियोजनाओं से सिंचित क्षेत्र का विस्तार हुआ, किंतु इसके साथ पारंपरिक सामुदायिक जल प्रबंधन प्रणालियों में परिवर्तन भी देखने को मिला। यह अध्ययन दर्शाता है कि दक्षिण भारत की ऐतिहासिक सिंचाई प्रणालियाँ आधुनिक जल प्रबंधन नीतियों के लिए महत्वपूर्ण ऐतिहासिक अनुभव प्रदान करती हैं।

Downloads

Published

2013-2025

Issue

Section

Articles