‘बजे मृदंग’ (हाइकु संग्रह) में संवेदना और शिल्प के नए क्षितिजों की तलाश
DOI:
https://doi.org/10.8855/2dkdn854Abstract
‘बजे मृदंग’ डाॅ॰ देवकीनन्दन शर्मा का सद्यः प्रकाशित हाइकु संग्रह है। इस हाइकु को पाँच खण्ड़ों (वंदन, प्रकृति, पर्व, जिन्दगी और प्रकीर्ण) में विभक्त किया गया है। इन पाँच खण्ड़ों में 300 हाइकु संकलित हैं। हाइकु मूलतः मुक्तक कविता है। संस्कृत साहित्य में मुक्तक की परिभाषा इस प्रकार दी गई है- ‘पूर्वापर प्रसंगे रस निरपेक्षापि रस चवर्णे क्रियैव तदैव मुक्तक’। यानी मुक्तक कविता अर्थ की दृष्टि से अपने पूर्व और पर प्रसंग से निरपेक्ष रहते हुए रस का आस्वादन कराती है। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने मुक्तक को परिभाषित करते हुए लिखा है- प्रबन्ध काव्य एक विस्तृत वनस्थली है तो मुक्तक काव्य एक चुना हुआ गुलदस्ता। आचार्य शुक्ल एक सफल मुक्तकार के लिए भाषा की समास शक्ति और कल्पना की समाहार शक्ति पर भी बल देते हैं। ये सभी शर्ते एक उत्कृष्ट हाइकुकार के लिए नितांत अपरिहार्य हैं।
