खुरदरे जीवन की भावुक कहानियां
DOI:
https://doi.org/10.8855/b5dhte43Abstract
“कहानियों को हर हाल में सुना जाना चाहिए । कहानियाँ अगर अनसुनी ही दफ्न हो जाएं तो बेचैन रूहों की तरह भटकती रहती हैं ।”
उपरोक्त कथन हरभगवान चावला के नवप्रकाशित कहानी संग्रह ‘बाँसुरी तथा अन्य कहानियाँ’ के प्रारंभ में दिया गया है । क्या यह कथन लेखक की उस मानसिकता को दर्शाता है जिसमें स्वयं के कथाकार के प्रति मोह होता है या यह पाठकों के प्रति आग्रह है कि उनकी (चावला जी की) कहानियाँ पढ़ी जानी चाहिए या फिर यह कथन हिन्दी कहानी की ही नहीं बल्कि कहानी की उस लम्बी व समृद्ध परम्परा की तरफ इशारा करता है जो दादी-नानी की कहानियों से लेकर जातक कथाओं और दुनिया की विभिन्न संस्कृतियों व सभ्यताओं में निहित हैं । यह प्रश्न जितना सहज दिखाई देता है इसका जवाब उतना ही दुष्कर हो सकता है । खैर, इसका जवाब हम पाठकों के विवेक पर ही छोड़ देते हैं ।
