बसोहली चित्र-षैली में लोक-तत्व

Authors

  • डा0 शहाना तबस्सुम  Author

DOI:

https://doi.org/10.8855/sqv1ez81

Abstract

  पहाड़ी कला-आन्दोलन की बसोहली शैली के चित्र लोक-परम्परा के अधिक निकट रहे हैं और इसमें निर्वाह भी लोकग्राह्य मानदण्ड के अनुकूल ही होता रहा। अतः इनमें लोक कला के शैलीगत गुण लगभग अक्षुण्य ही बने रहे हैं। बसोहली चित्र-शैली को लोक-कला परम्परा ने न केवल माध्यमों, रंगों, रेखाओं में ही प्रभावित किया है अपितु इस चित्र-शैली की प्रतीकात्मक और शैलीगत अभिव्यक्ति में भी लोकतत्व का बहुत योगदान रहा है। मानव की मूल अनुभूतियों से प्रसूत इन प्रतीकों में परानुभूतिपरक गुण पूरी तरह से विद्यमान हैं। 

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Published

2013-2025

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Articles