कोविड-19 के बाद ग्रामीण–शहरी विकास का पुनर्संतुलन: भारत और यूरोपीय संघ के अनुभवों का तुलनात्मक अध्ययन

Authors

  • डॉ. सर्वेश्वर पांडेय Author

DOI:

https://doi.org/10.8855/ytkv2h02

Abstract

 कोविड-19 महामारी केवल एक सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट नहीं थी; उसने आधुनिक विकास-व्यवस्था, शहरीकरण, श्रम-प्रवास, आपूर्ति-शृंखला, सामाजिक सुरक्षा और स्थानीय शासन की संरचनात्मक कमजोरियों को भी उजागर किया। भारत में महानगरों से ग्रामीण क्षेत्रों की ओर प्रवासी श्रमिकों की अचानक वापसी ने यह स्पष्ट किया कि ग्रामीण और शहरी अर्थव्यवस्थाएँ अलग-अलग इकाइयाँ नहीं, बल्कि परस्पर निर्भर विकास-तंत्र के हिस्से हैं। दूसरी ओर, यूरोप में महामारी के दौरान दूरस्थ कार्य, छोटे नगरों और ग्रामीण क्षेत्रों की ओर आवासीय झुकाव, स्थानीय खाद्य प्रणालियों की उपयोगिता तथा सामुदायिक सहयोग ने शहर-केंद्रित विकास मॉडल की सीमाओं पर नया विमर्श आरम्भ किया।

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2013-2026

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Articles