बुन्देलखण्ड क्षेत्र से ग्रामीण जनसंख्या का शहरों की ओर पलायन विश्लेषणात्मक-अध्ययन
DOI:
https://doi.org/10.8855/c22apj45Abstract
एक बेहतर जीवन जीने की ललक हर किसी के मन में होती है। एक अच्छा जीवन स्तर, सुख सुविधाओं व संसाधनों को जुटाने के लिये मनुष्य शुरू से ही एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाता रहा है। एक बेहतर कल की आकांक्षा लिये व्यक्ति सपरिवार बोरिया बिस्तर लेकर महानगरों की ओर निकल जाता है परन्तु यह उत्प्रवासन उपलब्ध संसाधनों के सापेक्ष अत्यधिक हो जाने के कारण ग्रामीण व नगरीय जनसंख्या के अनुपात को बिगाड़ देता है व देश के सामाजिक आर्थिक ताने-बाने की अस्त व्यस्त कर देता है। गांवों से शहरों की ओर आने वाली एक बड़ी आबादी ने शहरी ढांचे को अस्त व्यस्त कर दिया व शहरी योजनाकारों के समक्ष अप्रत्यशित आबादी के नगर नियोजन की समस्या उत्पन्न कर दी है व शहरीय क्षेत्रों में मलिन बस्तियों का विस्तार हुआ। इस आबादी को शहरों में गुणवत्ताहीन, निम्न जीवन स्तर व्ययीत करना पड़ता है।
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2013-2026
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Section
Articles
