हिन्दी एवं पश्तो के समान छन्दों का व्यतिरेकी अध्ययन
DOI:
https://doi.org/10.8855/0wyqn322Abstract
छन्द काव्य का एक अनिवार्य और आधारभूत तत्व है, जो भाषा को लय, सौन्दर्य तथा संगीतात्मकता प्रदान करता है। हिन्दी काव्य की छन्द-परम्परा का विकास संस्कृत के समृद्ध छन्दशास्त्रीय आधार से हुआ है, जबकि पश्तो काव्य की छन्द-व्यवस्था मुख्यतः सिलाबोटोनिक प्रणाली पर आधारित मानी गई है। ऐतिहासिक और भाषिक पृष्ठभूमि में भिन्नता के बावजूद दोनों भाषाओं में मात्रा, लय, तुक, चरण तथा अन्य संरचनात्मक तत्वों के स्तर पर उल्लेखनीय साम्य दिखाई देता है। प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य हिन्दी और पश्तो छन्दों की अवधारणा तथा संरचनात्मक तत्वों का तुलनात्मक एवं व्यतिरेकी विश्लेषण करना, समान छन्दों की पहचान करना और दोनों परम्पराओं की विशिष्टताओं को स्पष्ट करना है। अध्ययन में तुलनात्मक, वर्णनात्मक और विश्लेषणात्मक पद्धति अपनाई गई है। हिन्दी और पश्तो छन्दशास्त्र से संबंधित ग्रंथों, काव्य-रचनाओं तथा छन्द-विषयक संदर्भ-ग्रंथों का अध्ययन कर वर्ण, मात्रा, गण/रुक्न, तुक, यति और चरण के आधार पर दोनों परम्पराओं की तुलना की गई है। अध्ययन में इन्द्रवज्रा, तोटक, मालिनी, अनुष्टुप, भुजंग प्रयात, पद्धरी/चौपाई और तोमर जैसे हिन्दी छन्दों के पश्तो समतुल्य छन्दों की चर्चा की गई है। निष्कर्षतः दोनों भाषाओं की छन्द-व्यवस्थाएँ पूरी तरह समान नहीं हैं, फिर भी उनके संरचनात्मक स्तरों पर पर्याप्त तुलनीयता मौजूद है, जो हिन्दी-पश्तो तुलनात्मक काव्यशास्त्र के लिए उपयोगी आधार प्रस्तुत करती है।
