जयशंकर प्रसाद का राष्ट्रीय चिन्तन एवं स्त्री दृष्टि

Authors

  • डाॅ0 शोभारानी श्रीवास्तव Author

DOI:

https://doi.org/10.8855/tayt8691

Abstract

छायावाद काल का साहित्य रीतिकालीन साहित्य से इतर एक अलग रूप में उभरा। अंग्रेजांे के सम्पर्क में आने से देश में व्याप्त कुछ सामाजिक परम्पराएं एवं रूढ़ियाँ टूटती हुयी दृष्टिगोचर होने लगीं। 

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Published

2013-2026

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Section

Articles