निरंकार देव सेवक- 'बाल साहित्य बच्चों के मनोभावों, जिज्ञासाओं और कल्पनाओं के अनुरूप
DOI:
https://doi.org/10.8855/20m7a842Abstract
बालकों की प्रिय पत्रिका के चंदामामा के सम्पादक श्री बाल शौरिरेड्डी बाल साहित्य वह है जो बच्चों के पढ़ने योग्य हो रोचक हो, उनकी जिज्ञासा की पूर्ति करने वाला हो उस में बुनियादी तत्वों का चित्रण हो। बच्चों के साहित्य में अनावश्यक वर्णन न हो। कथावस्तु में अनावश्यक पेचीदगी न हो। वह सरल, सहज और समझ में आने वाला हो। सामाजिक दृष्टि से स्वीकृत तथ्यों को प्रतिपादित करने वाला हो।
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2013-2025
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Articles