'कुमाऊँनी भाषा का साहित्य की ओर बढ़ते कदम'

Authors

  • मनोज कुमार आर्या Author

DOI:

https://doi.org/10.8855/74sm1410

Abstract

कुमाऊँनी भाषा उत्तराखंड के कुमाऊँ क्षेत्र की प्रमुख सांस्कृतिक पहचान है, जिसका साहित्य मौखिक परंपराओं, लोकगीतों, जागरों, कहावतों और धार्मिक कथाओं में समृद्ध रूप से मौजूद है। हालांकि, वैश्वीकरण, शहरीकरण और हिंदी-अंग्रेज़ी के प्रभाव के कारण यह भाषा संकट में है और इसे साहित्यिक मान्यता और संरक्षण की आवश्यकता है। बीते कुछ दशकों में कुमाऊँनी भाषा का साहित्य की ओर बढ़ता कदम देखा गया है, जिसमें लोक साहित्य, काव्य, नाटक और समकालीन लेखन को नई पहचान मिली है। डिजिटल युग में, कुमाऊँनी साहित्य को सोशल मीडिया, ब्लॉग, पॉडकास्ट और ऑनलाइन प्रकाशन के माध्यम से बढ़ावा मिल रहा है। शिक्षा प्रणाली में इस भाषा को स्थान देने, शोध कार्यों को प्रोत्साहित करने, और सरकारी नीतियों के तहत इसे संरक्षण देने की आवश्यकता है। यदि स्थानीय साहित्यकार, शोधकर्ता और युवा पीढ़ी इस भाषा को बढ़ावा देने के लिए सामूहिक प्रयास करें, तो कुमाऊँनी साहित्य को राष्ट्रीय और वैश्विक पहचान दिलाई जा सकती है।

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Published

2013-2024