हिन्दू अध्ययन- परंपरा से वैश्विक अकादमिक विमर्श तक (A Qualitative and Interdisciplinary Study)
DOI:
https://doi.org/10.8855/fxd96j26Abstract
हिन्दू अध्ययन (Hindu Studies) समकालीन वैश्विक अकादमिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण और निरंतर विकसित होता हुआ बहुविषयी क्षेत्र है, जिसकी बौद्धिक परंपरा सहस्राब्दियों पुरानी वैदिक सभ्यता से लेकर आधुनिक विश्वविद्यालयों और शोध-संस्थानों तक विस्तृत है। यह अनुशासन केवल धार्मिक ग्रंथों अथवा अनुष्ठानों के अध्ययन तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय जीवन-दृष्टि, नैतिक मूल्यों, दार्शनिक अवधारणाओं तथा सांस्कृतिक परंपराओं का समग्र, आलोचनात्मक और वैज्ञानिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है।यह शोध-पत्र इस धारणा को पुष्ट करता है कि हिन्दू अध्ययन एक जीवंत ज्ञान-परंपरा है, जो परंपरा और आधुनिकता के मध्य सेतु का कार्य करते हुए वैश्विक बौद्धिक विमर्श को नई दृष्टि प्रदान करता है। गुणात्मक शोध-पद्धति पर आधारित इस अध्ययन में वैदिक संहिताओं, उपनिषदों, पुराणों, दर्शन-ग्रंथों तथा आधुनिक व्याख्याओं का तुलनात्मक विश्लेषण किया गया है। इसके माध्यम से यह प्रतिपादित किया गया है कि हिन्दू अध्ययन मानव अस्तित्व, कर्तव्य, करुणा, सह-अस्तित्व तथा प्रकृति के साथ संतुलन जैसे सार्वभौमिक प्रश्नों पर गहन वैचारिक आधार उपलब्ध कराता है।आधुनिक वैश्विक समाज जिन जटिल समस्याओं—जैसे पहचान का संकट, सांस्कृतिक टकराव, नैतिक विघटन तथा पर्यावरणीय असंतुलन—से जूझ रहा है, उनके समाधान के लिए हिन्दू अध्ययन एक वैकल्पिक और समावेशी दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। यह न केवल पूर्व और पश्चिम के बीच संवाद को सशक्त बनाता है, बल्कि बहुसंस्कृतिवाद और अंतरधार्मिक समझ को भी प्रोत्साहित करता है।
