संत तुलसी साहिब के काव्य में  अहिंसा:  मानवीय संवेदना एवं आध्यमिक तत्व

Authors

  • प्रेम दास and प्रोफ़ेसर सुरभि शुक्ला Author

DOI:

https://doi.org/10.8855/pcp8yh79

Abstract

 प्रस्तुत शोध आलेख में हिंदी साहित्य की मध्यकालीन निर्गुण काव्य धारा के ज्ञानमार्गी संत तुलसी साहिब के काव्य का अनुशीलन करके अहिंसा, जीव मात्र के प्रति दया भाव, ऊंच-नीच के भेदभाव को समाप्त कर आत्मबोध, सहज साधना जैसी तत्वों को जनमानस तक पहुंचाने का प्रयास किया है l  संत काव्य जन सामान्य का काव्य है संत कवि समस्त जन समुदाय के प्रतिनिधि कवि थे l संत काव्य जीवन की क्षणभंगुरता, विषय सुख का त्याग, आत्मा परमात्मा का मिलन, घट घट वासी ब्रह्म, माया के बंधन से मुक्ति जैसे तत्वों से परिपूर्ण हैl  भारतीय जनमानस के चारित्रिक विकास से लेकर आध्यात्मिक विकास में संत कवियों का योगदान महत्वपूर्ण हैl "संत संप्रदाय विश्व संप्रदाय है और उसका धर्म विश्व धर्म हैl इस विश्व धर्म का मूलाधार है -हृदय की पवित्रता- सम्मत स्वाभाविक और सात्विक आचरण ने ही यहां धर्म का वृहद रूप ग्रहण किया है"

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Published

2013-2025