भूमंडलीकरण के परिप्रेक्ष्य में ।AIऔर बहुविषयी अनुसंधान: एक दार्शनिक दृष्टिकोण

Authors

  • वीणा राजश्री Author

DOI:

https://doi.org/10.8855/4vbpfq07

Abstract

 

प्रस्तुत शोध का मूल उद्देश्य भूमंडलीकरण की व्यापक प्रक्रिया में ।AI की बहुआयामी भूमिका तथा बहुविषयी अनुसंधान पर इसके गहन दार्शनिक प्रभावों का समग्र विश्लेषण करना है। वैश्वीकरण के इस द्रुतगामी युग में ।प् केवल एक तकनीकी उपकरण मात्र नहीं रहा, अपितु यह ज्ञान-निर्माण, सांस्कृतिक विनिमय, सामाजिक संरचना एवं वैज्ञानिक अन्वेषण की समग्र प्रकृति को मौलिक रूप से पुर्नपरिभाषित कर रहा है। इस अध्ययन में द्वितीयक स्रोतों, तुलनात्मक विश्लेषण, वैचारिक समीक्षा एवं दार्शनिक विवेचन पद्धति का व्यवस्थित उपयोग किया गया है। शोध में यह स्पष्ट रूप से पाया गया कि ।प्-संचालित बहुविषयी अनुसंधान परंपरागत ज्ञान की स्थापित सीमाओं को व्यापक रूप से विस्तारित करता है, किंतु साथ ही यह महामारी विज्ञान, नैतिकता, सांस्कृतिक विविधता एवं मानवीय स्वायत्तता से संबंधित अत्यंत जटिल एवं विचारणीय प्रश्न भी उत्पन्न करता है। भूमंडलीकरण की संदर्भ-भूमि में ।प् का अनुप्रयोग शोध-पद्धतियों में समावेशिता, अंतर-सांस्कृतिक संवाद एवं वैश्विक सहयोग की नवीन एवं असीमित संभावनाएँ प्रस्तुत करता है। इसके अतिरिक्त, ।प् के विकास ने पश्चिमी एवं गैर-पश्चिमी ज्ञान-परंपराओं के मध्य संतुलन स्थापित करने की चुनौती को भी रेखांकित किया है। निष्कर्षतः, एक न्यायसंगत, समावेशी एवं मानवीय गरिमा के अनुरूप ज्ञान-समाज की स्थापना हेतु ।प् के नैतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं दार्शनिक आयामों पर गंभीर, सतत एवं बहुस्तरीय विमर्श परम आवश्यक है।

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Published

2013-2025