सकारात्मक मानसिक स्वास्थ्य के विकास में आध्यात्मिकता का महत्त्व

Authors

  • डॉ० शालिनी कुमारी भावसिंका           and         डॉ० प्रतिभा कुमारी Author

DOI:

https://doi.org/10.8855/9j0x9w02

Abstract

 स्वास्थ्य हमारे जीवन का एक महत्त्वपूर्ण पहलू है चाहे वह शारीरिक हो या मानसिक।  जिस प्रकार शरीर का स्वास्थ्य होता है, उसी प्रकार मानसिक स्वास्थ्य भी होता है । जैसे शरीर सम्बंधित गतिविधियाँ की उत्तम अवस्था उत्तम शारीरिक स्वास्थ्य का पर्याय है वैसे ही मन एवं उससे सम्बंधित गतिविधियाँ की उत्तम अवस्था उत्तम मानसिक स्वास्थ्य का द्योतक है। जब मन तथा इससे सम्बंधित क्रियाएँ जैसे चिंतन, मनन, स्मरण, प्रत्यक्षण, सोचना, विचारना या बौद्धिक क्रियाओं में जब कोई विकार उत्पन्न होता है, तो मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है और हम कहते हैं कि हम मानसिक रूप से अस्वस्थ्य हैं। यह केवल मन तक ही सीमित नहीं रहता यह हमारे व्यक्तित्व में परिवर्तन लाकर हमारे सामाजिक, पारिवारिक एवं अन्य क्रियाओं को भी प्रभावित करता है। यह केवल बीमारियों की अनुपस्तिथि नहीं है बल्कि यह एक ऐसी अवस्था है जो व्यक्ति को अपनी क्षमता का एहसास करने में सक्षम बनाती है। एक अच्छा मानसिक स्वास्थ्य हमें इस योग्य बनाता है की हम चिंता, तनाव और अवसाद को संभाल सके, सही निर्णय ले सके, उत्तम कार्य कर सके एवं अपने समुदाय में योगदान दे सके। मानसिक स्वास्थ्य सदैव स्थिर नहीं रहता है कभी बेहतर हो सकता है तो इसमें कभी कोई विकार उत्पन्न हो सकता है या कभी गंभीर समस्याओं से भी ग्रसित हो सकता है। मनोवैज्ञानिकों द्वारा मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के क्षेत्र में कई कार्य किये जा रहे हैं आध्यात्मिकता भी उन्हीं में से एक है। कई अध्ययन बताते हैं कि आध्यात्मिक अभ्यास जैसे योग, ध्यान, प्रार्थना, मंत्र जप आदि मानसिक स्वास्थ्य को उत्तम बनाने में कारगर साबित हो रहे हैं, परन्तु नैदानिक क्षेत्र में इसका प्रयोग करने हेतु अभी अन्य कई वैज्ञानिक शोधों की आवश्यकता है।

 

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Published

2013-2025