गांधी का साम्य-योग, सर्वोदय और प्रेमचन्द
DOI:
https://doi.org/10.8855/z8bpds18Abstract
गांधी का साम्प-योग हमारे राष्ट्र को राजनीतिक और आर्थिक बन्घनों से मुक्ति प्रदान करने का अनुपम सिद्धान्त था। सवादेय सिद्धान्त की परिकल्पना साम्प योग पर आधारित थी। समता मूलक समाज की स्थापना में अतीत के जीवन दर्शन, युगीन अपेक्षाएं और भविष्य की दृष्टि से का सम्यक समावेश होता है। इसी सर्वाेदय सिद्धान्त को प्रेमचन्द ने भी अपने साहित्य में समाहित किया है। अपनी व्यवहारिक रचनाओं के लिए विख्यात साहित्यकार की रचनाधार्मता सर्वाेदय भाव से अनुप्राणित है। प्रस्तुत शोध पन्त में तर्क और साक्ष्य के आधार पर गांधी जी के साम्य योग, सर्वाेदय और प्रेमचन्द के सृजन में साभ्यता का अध्ययन किया गया है।
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2013-2026
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Section
Articles
