मोहन राकेश की कहानियों में टूटते संबंध् और जुड़े रहने की छटपटाहट
DOI:
https://doi.org/10.8855/3ef07c63Abstract
हिन्दी साहित्य के भण्डार में श्रीवृ(ि करने वाले मोहन राकेश समकालीन कथाकारों में अन्यतम हैं । इन्होंने हिन्दी कथा को दिखावे, बनावटीपन, उथलेपन, कटाक्षों के बंध्न से अलग करके एक अद्भुत अनोखा रूप प्रदान किया है, एक नई अभिव्यक्ति एक नयी आशा को संचरित किया है जो पिछले कई वर्षों से लगातार आगे आने का प्रयास कर रहा था । यही कारण है कि मोहन राकेश के कथा साहित्य में संवेदना की आध्ुनिकता है । उनकी रचना ध्र्मिता स्वतंत्राता के बाद भारतीय सामान्य जीवन का मौलिक परिचय देती है ।
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2013-2026
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Articles
