“शिवालिक क्षेत्र के एतिहासिक स्थल: बिलासपुर, सढौरा और लोहगढ़ का एक एतिहासिक अध्ययन”
DOI:
https://doi.org/10.8855/xq1dej94Abstract
हरियाणा क्षेत्रफल और जनसंख्या की दृष्टि से भारत का काफी छोटा हिस्सा है। लेकिन भारत के इतिहास में इसका महत्वपूर्ण स्थान रहा है। हरियाणा भारतीय संस्कृति का पालना रहा है। वेदों की रचना और गीता का उपदेश यहीं दिया गया। अर्जुन और कर्ण जैसे वीर योद्धाओं के धनुषों की टंकार यहीं गूंजी। हर्षवर्धन जैसे दानी शासक, बाणभट्ट और सूरदास जैसे महाकवि, हसन खान मेवाती और मोहन सिंह मंडार जैसे वीर योद्धा भी यहीं हुए। हरियाणा ने शक, कुषाण, हूण, तुर्क, मुगल और फिरंगीयों की तलवारों के गहरे घाव सहकर भी अपने धर्म, सभ्यता, संस्कृति और सम्मान को बचाए रखा। उत्तर हरियाणा में शिवालिक का क्षेत्र पड़ता है। यह क्षेत्र एतिहासिक दृष्टि से काफी समृद्ध है। यहाँ बिलासपुर, कपाल मोचन, छाछरौली, सढौरा और लोहगढ़ के एतिहासिक स्थल है। बिलासपुर और उसके पास ही सुरसती नदी के किनारे पर कपाल मोचन (सोमसर) का प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है जिसका विवरण पुराणों में मिलता है। इसी प्रकार सढौरा और लोहगढ़ दोनों स्थानों का संबंध वीर योद्धा बंदा सिंह बहादुर से रहा है। प्रस्तुत शोध पत्र में शिवालिक क्षेत्र के इन प्रमुख एतिहासिक स्थलों का अध्ययन किया जा रहा है।
