पंचायती राज में 33 प्रतिशत आरक्षण का महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण पर प्रभाव

Authors

  • डाॅ. प्रीति वर्मा, रामफुल रोलानियां Author

DOI:

https://doi.org/10.8855/0ajcj419

Abstract

भारत में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी ऐतिहासिक रूप से सीमित रही है। सामाजिक-सांस्कृतिक बाधाएँ, पितृसत्तात्मक संरचना और संसाधनों की कमी महिलाओं की राजनीतिक सक्रियता में बाधक रही हैं। इस स्थिति को बदलने के लिए भारत सरकार ने ग्रामीण शासन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से 73तक ब्वदेजपजनजपवदंस ।उमदकउमदज ।बज के माध्यम से पंचायतों में कम से कम 33 प्रतिशत सीटों का आरक्षण सुनिश्चित किया। इस संवैधानिक प्रावधान ने ग्रामीण स्तर पर महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी में ऐतिहासिक वृद्धि की। वर्तमान में भारत में पंचायतों में लगभग 13 लाख से अधिक महिलाएँ निर्वाचित प्रतिनिधि के रूप में कार्य कर रही हैं और कुल प्रतिनिधियों में उनका हिस्सा लगभग 44 प्रतिशत तक पहुँच चुका है। यह शोध-पत्र पंचायतों में 33 प्रतिशत आरक्षण के प्रभाव का विश्लेषण करता है तथा यह समझने का प्रयास करता है कि इस नीति ने महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण, नेतृत्व क्षमता, निर्णय-निर्माण में भागीदारी और ग्रामीण शासन में उनकी भूमिका को किस प्रकार प्रभावित किया है। साथ ही यह शोध उन चुनौतियों की भी समीक्षा करता है जो महिलाओं को पंचायत स्तर पर प्रभावी नेतृत्व करने में बाधित करती हैं। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि यह आरक्षण व्यवस्था महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने में अत्यंत प्रभावी रही है, परन्तु वास्तविक सशक्तिकरण के लिए सामाजिक संरचना, शिक्षा, प्रशिक्षण और संस्थागत समर्थन में सुधार आवश्यक है।

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Published

2013-2025