भारत की विदेश नीति विकासए सिद्धांत और चुनौतियाँ
DOI:
https://doi.org/10.8855/yycmya56Abstract
भारत की विदेश नीति स्वतंत्रता के पश्चात निरंतर परिवर्तनशील रही हैए जो समय.समय पर वैश्विक राजनीतिकए आर्थिक और सामरिक परिवर्तनों के अनुरूप विकसित हुई है। प्रारंभिक चरण में गुटनिरपेक्षता और पंचशील जैसे सिद्धांतों पर आधारित यह नीति शीत युद्ध के दौरान संतुलन बनाए रखने का माध्यम बनी। बाद के वर्षों मेंए विशेष रूप से आर्थिक उदारीकरण के पश्चातए भारत ने आर्थिक कूटनीतिए बहुपक्षवाद और रणनीतिक साझेदारियों पर अधिक ध्यान केंद्रित किया। 21वीं सदी में श्।बज म्ंेज च्वसपबलश्ए श्छमपहीइवनतीववक थ्पतेजश् तथा इंडो.पैसिफिक रणनीति जैसे नए आयामों ने भारत की वैश्विक भूमिका को सुदृढ़ किया है। हालांकिए चीन के साथ सीमा विवादए पाकिस्तान के साथ तनावए आतंकवादए ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियाँ अभी भी महत्वपूर्ण बनी हुई हैं। यह अध्ययन भारत की विदेश नीति के विकासए उसके प्रमुख सिद्धांतों तथा समकालीन चुनौतियों का समग्र विश्लेषण प्रस्तुत करता हैए जिससे वैश्विक परिदृश्य में भारत की रणनीतिक स्थिति को समझा जा सके।
