कौटिल्य के अर्थशास्त्र में न्याय एवं विधि विषयक चिंतन
DOI:
https://doi.org/10.8855/fvvy9z96Abstract
यह शोध-पत्र अर्थशास्त्र में प्रतिपादित न्याय एवं विधि संबंधी चिंतन का विश्लेषण प्रस्तुत करता है। कौटिल्य ने राज्य की स्थिरता, सामाजिक व्यवस्था तथा लोककल्याण के लिए न्याय और विधि को अत्यंत आवश्यक माना। अर्थशास्त्र में न्याय व्यवस्था, दण्डनीति, न्यायालय प्रणाली, साक्ष्य व्यवस्था तथा अपराध एवं दण्ड संबंधी सिद्धांतों का विस्तृत वर्णन मिलता है। कौटिल्य के अनुसार राजा का प्रमुख कर्तव्य प्रजा की रक्षा एवं न्यायपूर्ण शासन स्थापित करना है। उन्होंने विधि को शासन संचालन का आधार तथा दण्ड को सामाजिक अनुशासन बनाए रखने का प्रभावी साधन माना। इस अध्ययन में कौटिल्य के न्यायिक एवं विधिक विचारों की समकालीन प्रासंगिकता का भी मूल्यांकन किया गया है। शोध से स्पष्ट होता है कि कौटिल्य का चिंतन व्यावहारिक, प्रशासनिक दृष्टि से सुदृढ़ तथा आधुनिक सुशासन की अवधारणाओं से काफी हद तक साम्य रखने वाला है।
