डुअर्स की जनजातीय दुनिया में वैचारिक संघर्ष
DOI:
https://doi.org/10.8855/7pg6z831Abstract
डुअर्स एक जनजातीय बाहुल क्षेत्र है, भौगोलिक दृष्टिकोण से हिमालय की सबसे निचली श्रेणी शिवालिक के बाद का उत्तर पूर्वी समतल क्षेत्र डुअर्स के नाम से जाना जाता है। इस क्षेत्र को भारतीय एवं भूटान संस्कृति के मिलन का केंद्र स्थल भी कहा जाता है। यहां जीवन के प्रत्येक पहलू में विविधता विद्यमान है भौगोलिक, भाषाई, धार्मिक, प्रजातिय्ा, संास्कृतिक, आर्थिक विविधताएं सहज ही देखी जा सकती है। यह क्षेत्र चाय बागानों एवं अभ्यारण®ं के लिए भी प्रसिद्ध है। इस प्रकार डुअर्स विविधता का एक उत्तम उदाहरण प्रस्तुत करता है। विविधता में एकता भारतीय समाज की एक अनोखी विशेषता है, जो वैश्विक समुदाय को भी आश्चर्यचकित करती है। परंतु इसका यह अर्थ कदापि नहीं की डुअर्स की जनजातीय दुनिया में संघर्ष अनुपस्थित है। इस श¨ध आलेख में संघर्ष की सैद्धांतिक व्याख्या की गई है, साथ ही डुअर्स क्षेत्र में निवास कर रहे जनजातीय समुदायों के बीच व्याप्त संघर्षों के विभिन्न स्वरूपों का विश्लेषणात्मक विवरण भी प्रस्तुत किया गया है। यह आलेख क्षेत्र कार्य पर आधारित है जो पूर्णता एक अनुभवाश्रित अध्ययन है।
