दहेज प्रथा और हरिशंकर परसाई के साहित्य में सामाजिक व्यंग्य: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन

Authors

  • चित्रार्धनी पटेल Author

DOI:

https://doi.org/10.8855/gzky5m15

Abstract

प्रस्तुत शोध-पत्र हिंदी के महान व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई के साहित्य में व्याप्त 'दहेज प्रथा' के विरुद्ध प्रहारों का विश्लेषण करता है। परसाई जी ने अपनी पैनी दृष्टि से यह सिद्ध किया कि दहेज केवल एक कुप्रथा नहीं, बल्कि मध्यवर्गीय पाखंड, पूँजीवादी मानसिकता और पितृसत्तात्मक अहंकार का मिश्रण है। 'निठल्ले की डायरी', 'बारात की वापसी' और 'सदाचार का ताबीज' जैसी रचनाओं के माध्यम से उन्होंने विवाह के नाम पर होने वाली 'इंसानी सौदेबाजी' को बेनकाब किया है। यह शोध पत्र परसाई के व्यंग्य की प्रासंगिकता को वर्तमान संदर्भ में परखने का प्रयास करता है।

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Published

2013-2025