भारत में लैंगिक असमानता की समस्या: एक समाजशास्त्रीय अध्ययन
DOI:
https://doi.org/10.8855/3maab627Abstract
भारतीय समाज में लैंगिक असमानता एक गंभीर समस्या है, जो समाजशास्त्रीयों तथा अन्य समाज वैज्ञानिकों के लिए चिंता का विषय है। शहरी समाज की महिलाओं की तुलना में ग्रामीण समाज के महिलाओं में अधिक असमानता हैं। अध्ययन में यह पाया गया कि दक्षिण भारत के राज्यों की तुलना में उत्तर भारत के हिन्दी भाषा-भाषी राज्यों में लैंगिक असमानता अधिक है। आज भी महिलाएं हिंसा का शिकार हो रही हैंए बलाल्कारए देहज हत्या, कन्या हत्या, भ्रूण हत्या, असमान लिंगानुपातए यौन हिंसाएमानसिक प्रताड़ना आदि महिलाओं के निम्र स्थिति को दर्शाती है। यह सच है कि सरकार, नीति निर्माताओं, अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों एवं स्वयंसेवी संगठनों ने लैंगिक असमानता को दूर करने के लिए कई सराहनीय कदम उठाये हैं,जैसे- कान्या भू्रण हत्या रोकथाम कानून, दहेज निषेध अधिनियम, बाल विवाह निषेध अधिनियम, महिलाओं के लिए शिक्षा एवं रोजगार के अवसर, मातृत्व सुरक्षा कार्यक्रम आदि महत्वपूर्ण हैं। फलस्वरूप महिलाओं की स्थिति में जितना सुधार होना चाहिए था, उतना सुधार कई कारणों से संभव नहीं हो पाया है। इसका कारण समाज का स्वरूप ही पितृसत्तात्मक है, साथ ही बाल-विवाह का प्रचलनए वैवाहिक कुरीतियाँए नारी चल-संपत्ती के रूप मेंएपितृसत्तात्मक जीवन मूल्य, संयुक्त परिवार, इस्लामी संस्कृति का प्रभाव, अशिक्षा, पुरूषों पर आर्थिक निर्भरता आदि लैंगिक असमानता में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। प्रस्तुत अध्ययन के अन्तर्गत द्वितीयक श्रोंतों का प्रयोग किया गया है। यह अध्ययन समस्त भारत के परिपेक्ष्य में किया गया है।
